Wednesday, September 9, 2009

कागज़





जब मुझे रजिस्टर में से
कागज़ फाड़ना होता है
मैं हाशिये को
मोड़कर फाड़ लेती हूँ
वरना
उससे जुड़ा
बहुत आगे का
पन्ना भी फट जाता है

भविष्य है
क्यूँ फाडू अपने ही हाथों




अंतिम क्षण





जैसे जैसे
इंसान
ठंडा पड़ता जाता है
उसकी
आंखों की पुतलियाँ
धीरे धीरे
फैलने लगती हैं

उधर
खुदा का दरवाज़ा
धीरे धीरे खुलने लगता है
उसके यहाँ
गर्मी
जो बढ़ जाती है



Sunday, September 6, 2009

रक्त







धमनी से निकला रक्त
चमकीला लाल होता है
यह झटके से बाहर निकलता है

शिरा के फटने पर
गहरा लाल रक्त
बंधी हुई धारा में निकलता है

दोनों का मिला हुआ रक्त
घाव के तले से उमड़ पड़ता है


अधिकांश धमनियां और शिराएं
पास पास पड़ी होती हैं
हिन्दू- मुस्लमान की तरह
दोनों अक्सर
एक साथ चोट खा जाती हैं




Saturday, September 5, 2009

सूखा जख्म




जब तक न काटें
ठीक नहीं होता
कई परतें मिलती हैं
खाने एक दूसरे से सटे पर
कटे कटे
इन परतों को तोड़ना पड़ता है
सब खानों को
फिर से एक करना पड़ता है
जख्म को
ताज़ा करना पड़ता है
तभी वह
ठीक से भर पाता है




बीच की दराज़








यह हमेशा फंसी रहती है

ऊपर वाली और
नीचे वाली को
तीन चार बार
खोलना पड़ता है

तब जाकर
बीच वाली दराज़ खुलती है

बीच की चीज़
कभी अच्छी नहीं होती




OK



बिजली के सारे स्विच चेक
कर लिए गए हैं
सब पर ओके लिख दिया गया है

जिम्मेदारी से मुक्ति

ज़िन्दगी पर क्या कभी
OK लिखा जा सकता है ?

वो





मेरे सामने की कुर्सी पर


आकर बैठती है
रोज़ मेरी मेज़ पर


पेन से गोले बनाती है
छोटे गोले
बड़े गोले
आधे तिरछे गोले
बस बनाती चली जाती है
और कुछ कुछ बोलती जाती है
मैं मना नहीं कर पाती
गोलों में उसका मन जो दिखता है


हाँ मेज़ को रोज़


साफ़ करवाना नहीं भूलती




आज वो आई नहीं
मेज़ चमक रही है
गोलों की प्रतीक्षा में





रेखा


जब भी दिन का अंत होता है
मैं रजिस्टर में
एक रेखा के बीच में
क्रॉस लगाती हूँ

मुझे पता नहीं चलता
आदतें
कब हमारी पहचान बन जाती हैं

पता नहीं

कैलेंडर



महीना बदलते समय
धागा आगे करना पड़ता है
कागज़ थोडा सा फट जाता है
धागा छोटा होता जाता है

ज़िन्दगी की तरह

टेलीफोन







तार का स्प्रिंग एक बार उल्टा
घूम जाए तो सीधा नहीं होता
चाहे रिसीवर को घुमाओ
या फिर तार के बलों को
एक न एक बल रह ही जाता है
रिश्तों की तरह

मेरी टेबल पर पड़ा यह BP Instrument









इसके cuff में हमेशा
हवा फंसी रह जाती है
और इसका मुंह
हमेशा खुला रहता है

अजगर की तरह