Wednesday, September 9, 2009

कागज़





जब मुझे रजिस्टर में से
कागज़ फाड़ना होता है
मैं हाशिये को
मोड़कर फाड़ लेती हूँ
वरना
उससे जुड़ा
बहुत आगे का
पन्ना भी फट जाता है

भविष्य है
क्यूँ फाडू अपने ही हाथों




2 comments:

  1. भविष्य है
    क्यूँ फाडू अपने ही हाथों...

    भविष्य उज्जवल है, क्योंकि सकारात्मक सोच वालों का भविष्य ठीक बताया जाता है।

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  2. bhavishya apne hi haatho main hai,tear it or save & make it,nice dr.minocha

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