Sunday, November 15, 2009

बदलाव




आजकल चूहे पकड़ना भी आसान काम नहीं रहा
मोर्टीन का केक खाकर सिर्फ़ आधी मौत मरते हैं
लत जो पड़ गई है
इम्युनिटी डेवलप हो गई है
पुरानी जंग लगी चूहेदानी
ईमानदारी की रोटी
अक्सर यूँ ही टंगी रह जाती है
इसे धोकर चमकाना पड़ता है
बाहर दरवाज़े पर रैट किलर रखना पड़ता है
भीतर रोटी की जगह टमाटर लगाना पड़ता है
तब कहीं जाकर एक चूहा पकड़ में आता है
वक्त के साथ हर सिस्टम बदलाव मांगता है
फ़िर चाहे वह रोटी हो
ईमानदारी हो
दवा
हो
चूहेदानी हो
चाहे साजिश