Sunday, September 26, 2010

दौड़


अक्सर
सब कामों के दलाल होते हैं
प्रोपर्टी के
प्लेसमेंट के
पासपोर्ट के
शेयर मार्केट के
अस्पतालों के
इन सबकी तो रोटी की दौड़ है


पर राजनेता होते हैं
सबसे बड़े दलाल
जो करते हैं देश को हलाल
इनकी दौड़ तो बेजोड़ है
बस आपसी होड़ है

हंसी


एक तरफ पार्क में सुबह सुबह योगा करते लोग
बेतहाशा हँसते
अपने नर्म नर्म हाथों से
तालियाँ बजाते


दूसरी तरफ अक्सर मंदिर के आगे
भंडारे के लिए खड़े लोग


अपने खुरदुरे
मेहनतकश हाथों से प्रसाद लेते
माथे पर शाम की रोटी की चिंता
बस पकड़ने की चिंता


क्या इन्हें सिखायेंगे हँसना और तालियाँ बजाना
नहीं ?
क्यूँ
डर लगता है न ?