Sunday, September 26, 2010

हंसी


एक तरफ पार्क में सुबह सुबह योगा करते लोग
बेतहाशा हँसते
अपने नर्म नर्म हाथों से
तालियाँ बजाते


दूसरी तरफ अक्सर मंदिर के आगे
भंडारे के लिए खड़े लोग


अपने खुरदुरे
मेहनतकश हाथों से प्रसाद लेते
माथे पर शाम की रोटी की चिंता
बस पकड़ने की चिंता


क्या इन्हें सिखायेंगे हँसना और तालियाँ बजाना
नहीं ?
क्यूँ
डर लगता है न ?

2 comments:

  1. kafi sambedansheel hai. likhte rahea.

    ReplyDelete
  2. सीधा-सच्‍चा सवाल.

    ReplyDelete