Wednesday, June 15, 2011

जुगाड़

रसोई बनाने के लिए सामग्री जुटाने की जुगाड़ 
सर्दी के कपडे रखने के लिए अलमारी में
जगह बनाने की जुगाड़ 
कूलरों को खिड़की में फिट करने की जुगाड़ 
एयर कन्डीशन का बिल कम करने की जुगाड़  
घर के लिए लोन लेने की जुगाड़ 
फिर उसे चुकाने की जुगाड़


मेट्रो में बैठने की जगह की जुगाड़ 
यहाँ तक कि 
टी वी का रिमोट भी अक्सर जुगाड़ से चलता है 
टेप लगाकर या थप्पड़ मारकर 
लातों के भूत बातों से नहीं मानते 
सरकार हो या भ्रष्टाचार
मदारी बन्दर को घुमादे दो चार बार
पैसे कमाने की है ये जुगाड़


घड़ी और केलेंडर लगाने के लिए कील ढूंढने की जुगाड़ 
आस पास की हर चीज़ में आपको जुगाड़ नज़र आएगी 
एक गाडी होती है जिसका नाम ही  'जुगाड़ ' होता है 
जेनेरेटर  से चलती है 
जिंदगी भी एक गाडी ही तो है 
धक्का देकर कब तक चलाएंगे 
पेट्रोल तो डालना ही पड़ेगा 

ईमानदारी का हो या बेईमानी का
क्या फर्क पड़ता है 
जुगाड़ तो करनी ही पड़ती है 
मौत की गाडी का तो पता नहीं 
वो तो जुगाड़ से भी रूकती नहीं


Wednesday, April 20, 2011

लौ







धूप बत्ती अक्सर आधी जलकर बुझ जाती है 

पूरी जले उसके लिए जरुरी है कि 
उसका सिरा पूरी तरह से आग पकडे 
उसे उल्टा कर के 
किनारे से जलाना पड़ता है
जब तक पूरी तरह से लौ नहीं पकडे उल्टा ही पकडे रहना पड़ता है 
फिर सीधा करके हाथ से हवा करनी होती है 
तब वह पूरी नीचे तक जलती रहती है 
जन्म से लेकर मृत्यु तक 

Friday, February 11, 2011

फरवरी



पूँछ कटा हुआ महीना 
गर्मी और सर्दी के बीच झूलता 
वेलेंटाइन संस्कृति को हैरत से देखता 
बसंती पीले फूलों को ढूंढता 

बोझ ढोता
बजट का बोझ 
इन्कम टैक्स रिटर्न का बोझ 
परीक्षाओं का बोझ 
अक्सर सोचती हूँ कि बोझ ढोते ढोते
सिकुड़ गया होगा बेचारा 
फरवरी का महीना