Wednesday, April 20, 2011

लौ







धूप बत्ती अक्सर आधी जलकर बुझ जाती है 

पूरी जले उसके लिए जरुरी है कि 
उसका सिरा पूरी तरह से आग पकडे 
उसे उल्टा कर के 
किनारे से जलाना पड़ता है
जब तक पूरी तरह से लौ नहीं पकडे उल्टा ही पकडे रहना पड़ता है 
फिर सीधा करके हाथ से हवा करनी होती है 
तब वह पूरी नीचे तक जलती रहती है 
जन्म से लेकर मृत्यु तक 

25 comments:

  1. बहुत गहरी संवेदनाएं अभिव्यक्त हुई हैं आपकी इस रचना में .....धुप बत्ती कि बिम्ब बहुत खूब तरीके से संवेदना को अभिव्यक्त कर गया ...आपका आभार

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  2. गहरी सोच व्यक्त करती रचना...

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  3. दिया और बाती में झिलमिलाता जीवन दर्शन.

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  4. बहुत सुंदर ...... बेमिसाल

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  5. sunder rachna ke liye shuriya
    .....bahut gehri abhivyakti......

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  6. meenu di
    bahut hi gahri baat is chhoti si kavita ke jariye aapne kahi hai . seedhe baat dil me utar gai.
    is haghan abhivyakti ke liye aapko hardik badhai.
    poonam

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  7. जी वाकई
    बहुत आसान शब्दों मेंजीवन की
    सच्चाई को पेश किया है आपने।

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  8. ek bahut hi gahri aur philosophical. approch wali kavita man ko kahih jhinjodti hui ..

    badhayi .

    मेरी नयी कविता " परायो के घर " पर आप का स्वागत है .
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/04/blog-post_24.html

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  9. संवेदनाओं को विस्तार देेता है आपका शब्द संसार। अच्छा लिखा है आपने।

    मैने अपने ब्लाग पर एक कविता लिखी है-शब्दों की सत्ता। समय हो तो पढ़ें और प्रतिक्रिया भी दें।

    http://www.ashokvichar.blogspot.com/

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  10. ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.

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  11. क्या बात है, काबिले तारीफ

    दुनाली पर देखें
    चलने की ख्वाहिश...

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  12. भगवान राम ने शिव-धनुष तोंड़ा, सचिन ने दूसरों का बनया रिकार्ड तोड़ा, अन्ना हजारे ने अनशन तोड़ा, प्रदर्शन-कारियों रेलवे-ट्रैक तोड़ा, विकास-प्राधिकरण ने झुग्गी झोपड़ियों को तोड़ा। तोड़ा-तोड़ी की परंपरा हमारे देश में पुरानी है। आपने कुछ तोड़ा नहीं अपितु ममता से समाज को जोड़ा है। इस करुणा और ममता को बनाए रखिए। यह जीवन की पतवार है। आपकी रचना का सार है।
    साधुवाद!
    =====================
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  13. आप डोक्टर के साथ साथ दार्शनिक प्रतीत होती है.........अच्छा है .

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  14. beautiful and deep thoughts !!!

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  15. हाँ अकसर ऐसा ही होता है ज़िन्दगी भी आधी अधूरी सुलगती सुबकती रहती है ....

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  16. issi ka naam zindgi

    bahut hi khubsurat likha hai
    http://shayaridays.blogspot.com

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  17. जीवन मृत्यु का अनोखा वर्णन ! सुन्दर !
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - स्त्री अज्ञानी ?

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  18. इस लो को बुझने नही देना :)

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