Sunday, July 21, 2013

यादें






सितारों  तुम  तो  अतीत  हो
फ़िर  क्यूँ  दिखा  करते  हो 
अक्सर 
वर्तमान  में
जैसे  यादें  टंगी  हों
आसमान  में
कुछ  मरी  हुई  
लाल  सियाही  के  समान
कुछ
छोटी  छोटी 
रुई  के  फाहों  सी  सफ़ेद  यादें
आज  उगा  है  एक  और  नया  सितारा
मनो  कोई  याद  किसी  का  हाथ  छोड़कर
भाग  आई  हो
और  चिपक  गई  हो  आसमान  में
झिलमिल  सी
टिमटिमाती  सी
जिंदा  याद
झुरमुट  में  गम  होती याद
धीरे  धीरे  मरती  याद

अपने  निशान  छोड़  जाती  याद 

1 comment:

  1. यादें कभी मरती नहीं ... चमकती हैं आसमां मिएँ तारों की तरह ... दुबारा याद आने के लिए ...

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