Sunday, August 11, 2013

ढक्कन

किसी भी शीशी को खोलने के लिए उसके
ढक्कन को बड़ी जोर से घुमाना पड़ता है
अक्सर चाक़ू से उसकी नीचे की रिंग को अलग करना पड़ता है
तब जाकर खुलता है
अटूट बंधन है
सोनिया गाँधी और हमारे प्रधानमंत्री जी की तरह
काटते रहो वरना दोनों बस घूमते ही रहेंगे
एक साथ


साबुन

बर्तन मांजने का साबुन
जब नया नया खुलता है तो टिक्की जमी जमाई रहती है
चमकती हुई
अन्ना के शुरुआती आन्दोलन की तरह
धीरे धीरे उसका हलवा बनता जाता है
इस बीच नए स्टील वूल , स्कॉच बाईट आ जाते हैं
पुराने अक्सर गायब हो जाते हैं

हलवा फ़ैल फ़ैल कर
रगड़ रगड़ कर सबकी कालिख उतारता रहता है
कुछ मिटटी , पानी से मिला जुला
आम आदमी की तरह
केजरीवाल आन्दोलन की तरह

घिसते रहो
चमकाते रहो
दाग़ धब्बे दिखाते रहो
नयी टिक्की के आने तक
इसी से काम चलाते रहो



Wednesday, August 7, 2013

वीरान रास्ता






लोग  जाते  जाते 
मिटा  जाते  हैं
अपने  निशाँ
यादों  के  धुंधलाते 
निशाँ

जैसे  हरे  भरे  खेतों  में
मरी  हुई  पगडंडियाँ 
अजनबी  राहों  की
अजनबी  कहानियाँ
ये  कैसी  हैं  वीरानियाँ

इन  वीरानियों  से  होकर 
अक्सर  गुजरना  पड़ता  है
मुझे

बेरंग  से  बेनूर  रास्ते
सियाह  रात  में  जैसे
सूना  खामोश   आसमान

नस  नस  में  उतर  जाता  है 
अक्सर

कहाँ  जाते  होंगे 
ये  रास्ते

शायद  किसी 
अँधेरी  गुफा  में
जहाँ 
सूरज  का  एक  टुकडा 
तड़पता  होगा
बाहर निकलने  को
या  फ़िर 
किसी  कुएं  की  मुंडेर  तक
झांकते  हुए  अपना  अक्स  पानी  में
या  फ़िर 
किसी  पहाड़  के  साए  में 
गुम  होते
जरुर  किसी  खंडहर  में 
घुस  कर 
सो  जाते  होंगे 
ये  रास्ते

मन  करता  है
रंग  भर  दूँ  इन  में
लाल  पीले  हरे  नीले
इन्द्रधनुषी  रंग
सपनों  के  रंग
खुशबुओं  के  रंग
बारिशों  के  संग

अब  के  आओ  तो  लेते  आना
अपने  साथ

ओस  की  चमकती  बूँदें
हरी  भरी  दूब  की  नरमी
सूरज  की  गर्मी
चंदा  की  चांदनी
सितारों  की   हँसी

बागबां  से  मांग  लाना
खुशबू 
उधार

मांग  लेना   आसमान  से
लालिमा  उफक  की

ताकि  जब  जाओ  तो
जलते रहें    
यादों के  गुल ए शफ़क़ 
 बुलबुल के फानूसों की  तरह

हरदम
हरवक्त

रोशन  करते  रहें 
राहें
याद  दिलाते  रहें 
 कि 
गर्द  ए  कारवां  का  भी
रंग  होता  है
वो  सिर्फ़  दर्द  का  काफिला 
नहीं  होता  है
वीरानों  में  भी 
फूल  खिलाने  की
ताक़त  रखता  है

वीरान  रास्ता 
मुझे  बहुत  अखरता  है
अक्सर
वीरान  रास्ता 

मुझे  बहुत  अखरता  है